कोई इंसान, कोई हैवान


 वो, जो अपने जिस्म में कोई घाव लेकर घूमे,

उस घाव में दर्द कहाँ अगर तुम उतरो उसे किसी और पर

वो शख्स जिसकी आँखे आँसू से भरी हो, 

उस आँसू में नमी कहाँ अगर वज़ह बनो तुम किसी और के ग़म का

वो भरोसा जो हैवान भी आपस में रखते हैं,

उसके बगैर तुम किस मतलब से इंसान हो! 

वो, जिसके टूटे दिल से ख़ून बहता हो, 

उस ख़ून का क्या मोल अगर तुम किसी और का दिल तोड़ो? 

जो किसी रूह को मौत देकर ख़ुद को समझदार कहें, 

कभी ये नासमझ दुनिया भी तुम्हारी क़ातिल बनेगी, चाहें तुम कुछ भी कर लो |

Comments

  1. आशा है कि मेरी ये कविता आपको पसंद आयेगी, कुछ समझना हो तो जरूर कहें |

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