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Showing posts from March, 2024

कोई इंसान, कोई हैवान

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 वो, जो अपने जिस्म में कोई घाव लेकर घूमे, उस घाव में दर्द कहाँ अगर तुम उतरो उसे किसी और पर वो शख्स जिसकी आँखे आँसू से भरी हो,  उस आँसू में नमी कहाँ अगर वज़ह बनो तुम किसी और के ग़म का वो भरोसा जो हैवान भी आपस में रखते हैं, उसके बगैर तुम किस मतलब से इंसान हो!  वो, जिसके टूटे दिल से ख़ून बहता हो,  उस ख़ून का क्या मोल अगर तुम किसी और का दिल तोड़ो?  जो किसी रूह को मौत देकर ख़ुद को समझदार कहें,  कभी ये नासमझ दुनिया भी तुम्हारी क़ातिल बनेगी, चाहें तुम कुछ भी कर लो |

My Miellina

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 My morena, the autumn pools of your eyes Those could hold all my pain, look so faded now They shine in the sun like nothing ever could, Have you left them far behind? My luna, the glitter of your smile That fills me with energy every time I see it, It's been so long, I feel so dim Have you hidden somewhere unreachable to me? My regina, who held the reins over me You too gave yours to hold you close Now you press me where it hurts, Are you finally using your rules? My miellina, our hearts were tied together Perhaps now they are ripped apart I run to you, to be thrown in rain, Are they your tears that drown me in pain? 

क्या मैं भूलने लगा हूँ?

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  सुबह उठकर ख़ुदा के बाद तुम्हारें अलावा किसी हमदर्द का नाम लेने लगा हूँ, जहां किसी दिन तुम्हारा नाम लिखता था वहां मैं किसी और का नाम लिखने लगा हूँ | अब तुम्हारी उस गुलाबी सलवार से ज्यादा मुझे मेरी नीली रुमाल अच्छी लगती है,  उस रुमाल से मैं तुम्हारे होठों की खुशबु को खोने लगा हूँ | बारिश के छलकते बूंदों के साथ जब तुम नाचती थी,  वो नज़ारे अब गुम हो रहे हैं | तुम्हारें हाथो से भरें वो मेरे सारे पन्ने,  उन लफ़्ज़ों से मैं कहीं छुपने लगा हूँ | मेरी पुरानी किताबों में रखी वो तस्वीर तुम्हारी,  उसे ईन दिनों देखने का मन नहीं करता  शायद मैं हमारी यादों को ख़ुद से एक-एक कर ज़ुदा करने लगा हूँ | उस सर्द के दोपहर में जब हम लिपट कर खूब रोये थे,  वो पल मुझे अब बिल्कुल याद नहीं आता  क्या अखिर वक्त के साथ मैं तुम्हें  धीरे-धीरे अपनी जिंदगी से भूलने लगा हूँ?