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शुभकामना

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 दिन मेरे थे जब अंधेरे में उलझे बचाने आए थे वो परम हितैषी, अनेक लोगों के है वो उपकारी सहस्र मनुष्यों से है उनकी मित्रता! फिर आज उन पर कोई आशंका आए तो निस्तब्ध क्यूँ हो उनका घर आँगन? कड़ी दोपहर में जो तुम्हें छाया दे उसके खेतों में भी पर्याप्त वर्षा हो! हर समस्या में जो सबके हाथ थामे उस हाथ भी सारे बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो | जो करते हमारे परम सुख की अभिलाषा उनके जीवन से भी सारे दुःख नष्ट हो, इन उदार व्यक्ति के लिए सबके मन में सदैव शुभकामना हो |