ज़माना अंधेरे का
छोटे एक जिस्म में, तड़पती एक रूह बसती है
जिसे समंदर पार करना है बन रोशनी के,
सज़ा भुगत रही है किसी अनजान गुनाह के
अपने किस्मत लिखने की कोशिश मै, तैरती जा रही है |
हिम्मत हार कर कभी खुदको खत्म करना चाहती है,
मगर कुछ लोगों की सांसे तो उसके धड़कनों से ही चलती है!

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