अकाल
मुस्कान आपकी झूठी ही सही,
बेहतर कुछ ये नज़रे न देखी
इश्क़ आपका बेवफ़ा ही सही,
बेहतर कुछ इस दिल से न गुज़री |
बेज़ान पड़े थे अंधेरे में हम,
जिंदगी की रोशनी अपने दिखाई
फिरसे अंधेरे में छोड़ गए मगर,
आपके साथ बीते सुकून के पल
इस रूह में हमेशा होंगी बसी |

ये कविता उस प्यार के बारें में है जो आपको कभी मिला ही नहीं, ज़रा किसीके रिझाने से आपको स्वर्ग के एहसास होते है |
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