मेहंदी

 

पहली बार ही तो हाथो पर मेहंदी की लकीर रचाई, 

मेहंदी पर लिख दी दिल की कुछ राज़ सच्चाई |

रंग की गहराई इल्म नहीं पर ज़ज्बात की गहराई जरूर बतायी, 

फ़िर न जाने क्या हुआ, मेरी खुशी उसके चेहरे पर मुस्कराई |

Comments

  1. प्रिय पाठकों, नमस्कार, ये कविता पहली मेहंदी के पहले प्यार की भावना से बनी है | DEAR Readers, hello. This poem was made with the endearment over the first use of mehendi.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

My Cup of Tea

Such a tease

शुक्रगुज़ार