कुछ लफ़्ज़ इश्क के

ज़माने से पुराना ये दिल 

आपको सदियों से जनता है |

रूकते रुकते पत्थर बन गया, 

फ़िर भी आपके खातिर धड़कता है |

शबनम की नमी लेकर 

आप ख्वाबों की जमीन भीगाते है, 

चाँदनी बनकर आप हमारी 

यादों में बरसते रहते है |

इंसानियत की सच्चाई से बेख़बर ये दुनिया

आपको मिटाने का खौफ दिखती है, 

इसलिए रूह में दर्द समाकर 

आपसे नज़रे छिपाए रखते है |
 

Comments

  1. ये कविता एकदम सीधा है | इश्क मैं हर पल डर और खुशी होती है, भले ही उसकी आदत हो जाए पर दिल में ये उतार चढ़ाए चलती रहती है |

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